अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2025 में भारत की शक्ति का प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2025 में भारत की शक्ति का प्रदर्शन

भारत ने पहली बार अपने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और स्वदेशी निर्मित फ्रिगेट आईएनएस उदयगिरि को अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (International Fleet Review – IFR) 2025 में भेजा है। यह आयोजन 27 से 29 नवंबर 2025 तक कोलंबो में श्रीलंका नौसेना द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह दोनों जहाजों की पहली विदेशी तैनाती है, जो भारतीय नौसैनिक आत्मनिर्भरता और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगी संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत की भागीदारी का महत्व

आईएनएस विक्रांत की भागीदारी भारत की बढ़ती नौसैनिक आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता का प्रतीक है। यह कदम न केवल भारत की स्वदेशी निर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है, बल्कि सहयोगी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। भारत की उपस्थिति यह भी स्पष्ट करती है कि वह हिंद महासागर समुदाय में साझेदार नौसेनाओं के साथ सामरिक तालमेल को बढ़ावा देना चाहता है।

आईएनएस उदयगिरि की भूमिका

आईएनएस उदयगिरि, जो हाल ही में भारतीय नौसेना में शामिल हुई एक गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है, नौसेना के आधुनिकीकरण की अगली अवस्था का प्रतीक है। इसका IFR 2025 में शामिल होना घरेलू शिपयार्डों की क्षमता और नौसेना के संतुलित विस्तार की दिशा में हुई प्रगति को उजागर करता है। यह भारत के बढ़ते समुद्री सामर्थ्य और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में ठोस उपलब्धि को दर्शाता है।

कोलंबो दौरे के दौरान प्रमुख गतिविधियाँ

तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान दोनों जहाज औपचारिक निरीक्षण, शहर परेड, सामुदायिक कार्यक्रमों और पेशेवर संवादों में भाग लेंगे। जनता के लिए खुले घंटों में स्थानीय लोग जहाजों का दौरा कर सकेंगे, जिससे नौसैनिक कूटनीति और क्षेत्रीय जन-संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। यह भारत और श्रीलंका सहित क्षेत्र के देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को और मजबूत करेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईएनएस विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है।
  • आईएफआर 2025 श्रीलंका नौसेना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहा है।
  • आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि दोनों की यह पहली विदेशी तैनाती है।
  • दोनों जहाज भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के प्रतीक हैं।

भारत की यह भागीदारी हिंद महासागर क्षेत्र में अपने सामरिक उद्देश्यों को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। दो स्वदेशी युद्धपोतों की उपस्थिति न केवल भारत की नौसैनिक क्षमता का प्रदर्शन करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में यह कदम भारत को एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

Originally written on November 29, 2025 and last modified on November 29, 2025.

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