अंडमान सागर में भारत की पहली ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग परियोजना शुरू: ब्लू इकोनॉमी को नई दिशा
भारत ने समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और आर्थिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की पहली ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग परियोजना की शुरुआत की है। अंडमान सागर में शुरू की गई यह पायलट पहल भारत की “ब्लू इकोनॉमी” रणनीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और समुद्री क्षेत्रों को भूमि संसाधनों के समकक्ष मानते हुए विकास का नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
अंडमान सागर में उद्घाटन
यह परियोजना अंडमान द्वीप समूह के श्री विजया पुरम के पास स्थित नॉर्थ बे में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा उद्घाटित की गई। खुले समुद्र में किए गए इस क्षेत्रीय दौरे के दौरान मंत्री ने इसे भारत की समुद्री क्षमता को व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाने की दिशा में पहला ठोस प्रयास बताया और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप बताया।
भारत की ब्लू इकोनॉमी नीति को बढ़ावा
मंत्री ने स्वतंत्रता के बाद भारत की समुद्री क्षमता की उपेक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 के बाद से समुद्रों को भूमि संसाधनों के समान मूल्यवान संपत्ति के रूप में मानने की सोच विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि भारत के पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तटों की भौगोलिक विशेषताएं विभिन्न प्रकार के समुद्री व्यापार, मत्स्य पालन और समुद्री कृषि के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में विशिष्ट योगदान दे सकती हैं।
कार्यान्वयन और आजीविका केंद्रित दृष्टिकोण
इस पायलट परियोजना का कार्यान्वयन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, इसकी तकनीकी इकाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) और अंडमान और निकोबार प्रशासन के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। इसमें समुद्री फिनफिश और समुद्री शैवाल की खुले समुद्र में प्राकृतिक परिस्थितियों में खेती की जा रही है। यह परियोजना उन्नत समुद्री तकनीक को स्थानीय मछुआरा समुदायों की आजीविका सृजन से जोड़ने का प्रयास है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की पहली ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग परियोजना अंडमान सागर में शुरू हुई है।
- परियोजना का कार्यान्वयन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की इकाई NIOT द्वारा किया जा रहा है।
- ओपन-सी केज प्राकृतिक समुद्री परिस्थितियों को सहने की क्षमता रखते हैं।
- यह पहल भारत की ब्लू इकोनॉमी नीति के अनुरूप है।
तकनीक, संरक्षण और भविष्य की योजना
इस परियोजना के तहत गहरे समुद्र में शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिए सीवीड बीज वितरित किए गए, साथ ही NIOT द्वारा विकसित ओपन-सी केज में फिनफिश की खेती हेतु बीज भी दिए गए। यह पायलट परियोजना भविष्य में सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) के माध्यम से विस्तार से पहले व्यावसायिकता और व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने हेतु प्रारंभिक आधार तैयार करेगी। इस दौरान मंत्री ने वांडूर स्थित महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क का दौरा भी किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत की समुद्री विकास नीति में आर्थिक प्रगति और जैव संरक्षण का संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता है।
निष्कर्ष
अंडमान सागर में शुरू हुई यह पहल भारत की समुद्री शक्ति को आर्थिक संपन्नता और रोजगार सृजन के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह परियोजना ब्लू इकोनॉमी को धरातल पर उतारने का प्रयास है, जो मत्स्य पालन, समुद्री कृषि और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए भारत को एक समुद्र-केंद्रित अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाती है।